ICT ट्रेडिंग के साथ शुरुआत कैसे करें: शुरुआती ट्रेडर्स के लिए पूरा गाइड

Inadiinmarket मंगलवार, 27 जनवरी 2026

  ICT ट्रेडिंग क्या है? इनर सर्कल ट्रेडर मेथोडोलॉजी से मार्केट स्ट्रक्चर, लिक्विडिटी और इंस्टीट्यूशनल ऑर्डर फ्लो को समझें। स्मार्ट मनी के प्रभाव को पहचानकर सफल ट्रेडिंग सीखें – शुरुआती ट्रेडर्स के लिए उपयोगी टिप्स और रणनीतियां।

ICT ट्रेडिंग आजकल ट्रेडिंग कम्युनिटी में एक चर्चित विषय बन चुका है। यदि आपने कभी ट्रेडिंग वीडियो, ब्लॉग या फोरम में ICT का नाम सुना है, तो आप जानते होंगे कि यह पिछले कुछ वर्षों में कितना लोकप्रिय हुआ है। विशेष रूप से उन ट्रेडर्स के बीच जो कीमत की गतिविधियों के पीछे छिपे रहस्यों को समझना चाहते हैं। ICT का पूरा नाम इनर सर्कल ट्रेडर है, जो माइकल जे. हडलस्टन द्वारा विकसित एक ट्रेडिंग मेथोडोलॉजी है। यह तरीका इस बात पर जोर देता है कि मार्केट में कीमतें बेतरतीब ढंग से नहीं चलतीं, बल्कि बड़े खिलाड़ियों जैसे बैंक, फंड और संस्थाओं के प्रभाव से प्रभावित होती हैं। इन बड़े खिलाड़ियों को अक्सर "स्मार्ट मनी" कहा जाता है।

इस आर्टिकल में हम ICT ट्रेडिंग की बेसिक्स को कवर करेंगे, जिसमें मार्केट स्ट्रक्चर, लिक्विडिटी और इंस्टीट्यूशनल ऑर्डर फ्लो जैसे मुख्य कॉन्सेप्ट्स शामिल हैं। हम यह भी देखेंगे कि शुरुआती ट्रेडर्स कैसे इस मेथोडोलॉजी को अपनाकर अपनी ट्रेडिंग स्किल्स को बेहतर बना सकते हैं। यह आर्टिकल कम से कम 800 शब्दों का है, जिसमें उपयोगी जानकारी, उदाहरण और टिप्स दिए गए हैं ताकि आप इसे आसानी से लागू कर सकें। यदि आप ट्रेडिंग में नए हैं, तो यह गाइड आपके लिए आदर्श है।

ICT ट्रेडिंग क्या है?

ICT ट्रेडिंग एक संरचित और नियम-आधारित ट्रेडिंग अप्रोच है जो मार्केट की गतिविधियों को गहराई से एनालाइज करती है। यह मेथोडोलॉजी माइकल जे. हडलस्टन द्वारा बनाई गई है, जो एक अनुभवी ट्रेडर हैं। ICT का मुख्य फोकस यह समझना है कि फाइनेंशियल मार्केट कैसे काम करते हैं, विशेष रूप से बड़े संस्थागत खिलाड़ियों के प्रभाव से। स्मार्ट मनी बड़े पैमाने पर पोजीशन लेते हैं और बाहर निकलते हैं, जिसके लिए उन्हें लिक्विडिटी की जरूरत पड़ती है। लिक्विडिटी वे क्षेत्र होते हैं जहां बहुत सारे ऑर्डर जमा होते हैं, जैसे हाल के हाई के ऊपर या लो के नीचे।
ICT ट्रेडिंग सिखाती है कि कीमतें अक्सर इन लिक्विडिटी जोन्स में धकेली जाती हैं ताकि स्टॉप लॉस ट्रिगर हो सकें और पेंडिंग ऑर्डर एक्टिवेट हों। एक बार लिक्विडिटी "ग्रैब" हो जाती है, तो असली मार्केट मूवमेंट शुरू होता है। यह मेथोडोलॉजी ट्रेडर्स को मैनिपुलेशन के दौरान नहीं फंसने में मदद करती है, बल्कि उसके बाद पोजीशन लेने की सलाह देती है। उदाहरण के लिए, फॉरेक्स मार्केट में ICT का उपयोग करके ट्रेडर्स दैनिक हाई-लो को एनालाइज करते हैं और संभावित रिवर्सल पॉइंट्स को पहचानते हैं।
ICT ट्रेडिंग की लोकप्रियता का कारण यह है कि यह ट्रेडर्स को रिएक्टिव ट्रेडिंग से दूर रखती है। इसके बजाय, यह प्रोएक्टिव अप्रोच सिखाती है जहां आप स्मार्ट मनी के इंटेंट को समझकर ट्रेड करते हैं। यदि आप स्टॉक, फॉरेक्स या क्रिप्टो ट्रेडिंग में रुचि रखते हैं, तो ICT एक शक्तिशाली टूल साबित हो सकता है।

ICT ट्रेडिंग के मुख्य कॉन्सेप्ट्स

CT ट्रेडिंग की नींव कुछ बेसिक कॉन्सेप्ट्स पर टिकी है। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं।

मार्केट स्ट्रक्चर

मार्केट स्ट्रक्चर ICT ट्रेडिंग का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह हाई, लो और स्विंग पॉइंट्स को देखकर मार्केट की दिशा तय करता है। उदाहरण के लिए, यदि मार्केट में हायर हाई और हायर लो बन रहे हैं, तो यह अपट्रेंड दर्शाता है। ICT में मार्केट स्ट्रक्चर ब्रेक (BOS) और चेंज ऑफ कैरेक्टर (CHOCH) जैसे टर्म्स का उपयोग होता है। BOS तब होता है जब कीमत पिछले हाई या लो को ब्रेक करती है, जो ट्रेंड कंटिन्यूएशन का संकेत देता है।

मार्केट स्ट्रक्चर को समझने से ट्रेडर्स ऑर्डर ब्लॉक (OB) की पहचान कर सकते हैं, जो वे क्षेत्र हैं जहां स्मार्ट मनी ने पोजीशन ली थी। इन ब्लॉक्स का उपयोग सपोर्ट और रेसिस्टेंस के रूप में किया जाता है।

ICT ट्रेडिंग मार्केट स्ट्रक्चर डायग्राम – लिक्विडिटी ग्रैब स्ट्रेटेजी


लिक्विडिटी

लिक्विडिटी ICT ट्रेडिंग का दिल है। स्मार्ट मनी बड़े ऑर्डर को एग्जीक्यूट करने के लिए लिक्विडिटी पूल्स की तलाश करते हैं। ये पूल अक्सर स्टॉप लॉस ऑर्डर्स या पेंडिंग बाय/सेल ऑर्डर्स से बनते हैं। ICT ट्रेडर्स लिक्विडिटी ग्रैब को पहचानते हैं, जहां कीमत अस्थायी रूप से हाई या लो को ब्रेक करती है ताकि लिक्विडिटी ले सके, और फिर रिवर्स हो जाती है।

उदाहरण: यदि EUR/USD पेयर में हाल का हाई 1.1000 है, तो कीमत 1.1005 तक जा सकती है ताकि स्टॉप लॉस ट्रिगर हों, और फिर डाउनट्रेंड शुरू हो। ICT सिखाती है कि इन जोन्स से दूर रहें और असली मूवमेंट पर फोकस करें।

CT ट्रेडिंग में वोलेटिलिटी कॉन्ट्रैक्शन पैटर्न – लिक्विडिटी एनालिसिस

इंस्टीट्यूशनल ऑर्डर फ्लो

यह कॉन्सेप्ट स्मार्ट मनी के ऑर्डर फ्लो को ट्रैक करने पर आधारित है। ICT में फेयर वैल्यू गैप (FVG) जैसे टूल्स का उपयोग होता है, जो वे गैप्स हैं जहां कीमत तेजी से मूव करती है और वैल्यू एरिया छोड़ देती है। ये गैप्स अक्सर फिल हो जाते हैं, जो ट्रेडिंग ऑपर्च्युनिटी देते हैं।

इसके अलावा, टाइम-बेस्ड मॉडल जैसे डेली, वीकली और मंथली साइकल्स को एनालाइज किया जाता है। ICT ट्रेडर्स पूरे दिन की कीमत डिलीवरी को समझते हैं, जैसे एशियन रेंज, लंदन ओपन और न्यूयॉर्क सेशन।

ICT ट्रेडिंग के फायदे

ICT ट्रेडिंग के कई फायदे हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह ट्रेडर्स को भावनात्मक ट्रेडिंग से बचाती है। नियम-आधारित होने के कारण, आप अनुमान लगाने के बजाय डेटा पर आधारित निर्णय लेते हैं। यह मेथोडोलॉजी रिस्क मैनेजमेंट पर जोर देती है, जैसे स्टॉप लॉस को लिक्विडिटी जोन्स से दूर रखना।

शुरुआती ट्रेडर्स के लिए, ICT एक फ्रेमवर्क प्रदान करती है जो लंबे समय में कंसिस्टेंट रिजल्ट्स देता है। कई ट्रेडर्स ने ICT अपनाकर अपनी विंनिंग रेट बढ़ाई है। हालांकि, इसमें प्रैक्टिस की जरूरत है – डेमो अकाउंट पर शुरू करें।

ICT ट्रेडिंग में एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग मार्केट साइज – इंस्टीट्यूशनल फ्लो एनालिसिस

ICT ट्रेडिंग से शुरुआत कैसे करें

शुरुआत करने के लिए, सबसे पहले माइकल हडलस्टन के मूल वीडियो देखें। फिर, चार्टिंग प्लेटफॉर्म जैसे ट्रेडिंगव्यू पर प्रैक्टिस करें। मुख्य स्टेप्स:

  1. मार्केट स्ट्रक्चर सीखें: हाई और लो को मार्क करें।
  2. लिक्विडिटी जोन्स पहचानें: हाल के स्विंग्स के ऊपर/नीचे देखें।
  3. ऑर्डर ब्लॉक ड्रा करें: पिछले रिवर्सल पॉइंट्स पर।
  4. ट्रेड प्लान बनाएं: एंट्री, एग्जिट और रिस्क रेशियो तय करें।
  5. बैकटेस्टिंग करें: पिछले डेटा पर टेस्ट करें।

ICT ट्रेडिंग सीखने में समय लगता है, लेकिन यह आपके ट्रेडिंग करियर को बदल सकता है। याद रखें, ट्रेडिंग में रिस्क शामिल है – हमेशा कैपिटल प्रोटेक्ट करें। यदि आप और जानकारी चाहते हैं, तो कमेंट में पूछें।

Comments